भारत की समुद्री ताकत को नई धार देते हुए भारतीय नौसेना में अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत INS तारागिरी शामिल हो गया है. विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में इसकी कमीशनिंग हुई. ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलों से लैस यह युद्धपोत फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक भारत की रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करने वाला है.
‘तारागिरी’ युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है. ये मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती हैं. इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक खास एंटी सब्मरीन सिस्टम भी लगा है. घातक हथियारों से लैस यह युद्धपोत दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है.
भारत की समुद्री रणनीति में क्यों अहम है INS तारागिरी?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईएनएस तारागिरी को एक स्टेट ऑफ द आर्ट वॉरशिप करार दिया. उन्होंने कहा कि तारागिरी की कमीशनिंग, भारत की बढ़ती हुई सामुद्रिक शक्ति का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि हमारी नौसेना भारत के मूल्यों और प्रतिबद्धता का प्रतीक है. आईएनएस तारागिरी की कमीशनिंग , भारतीय नौसेना की ताकत में, मूल्यों में, तथा प्रतिबद्धता में और वृद्धि करेगी.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में ‘मरीन पावर’ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा, तीन तरफ से समुद्र से घिरा होना और 95% व्यापार का समुद्री रास्तों से होना इस बात को साबित करता है कि मजबूत नौसेना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है. ऐसे में INS तारागिरी का शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है.